“मुहुर्त विषयक विभिन्न योगो का शुभ अंक”
अभिजित मुहुर्त मुहुर्तो का राजा कहा जाता है, दिन मे 15 ओर रात्री मे पन्द्रह मुहुर्त प्रतिदिन होते हैं,
दिन के 15 मुहुर्तो मे आठवा मुहुर्त अभिजित मुहुर्त कहलाता है, दिनमान का पन्द्रहवां भाग एक मुहुर्त माना जाता है,
ज्योतिषीयो ने एक निर्णय करके दिन मे प्रतिदिन 11:45 से 12:15 बजे तक का अभिजित मुहुर्त दिया गया है,
इस समय मे जन्म लेने वाले बालक राजा जेसा होता है,
आज के युग मे मिनिश्टर , चिफ़ मिनिश्टर, प्राइम मिनिश्टर, जिले का राजा या कलेक्टर या इसके समान s.p. , d.s.p., कमीश्नर आदि बनते है,,
इस मुहुर्त मे आरम्भ किये गये सभी कार्य सफ़ल होते हैं,
परन्तु इसके साथ कुछ अपवाद भी होते हैं,
जैसे – बुधवार के दिन यह मुहुर्त निषिद्ध फ़ल देता है तथा अभिजित काल मे दक्षिण दिशा की ओर की यात्रा भी असफ़ल हो जाती है,
तिथी की संख्या मे वार की संख्या जोड़ने से जैसे वार गुरुवार की संख्या 5 ओर तिथी अष्टमी हो तो 5 ओर आठ 13 आयेगा, इस प्रकार तिथी ओर उस दिन के वार की संख्या का योग यदि 13 हो तो क्रकच योग बन जाता है,
इस क्रकच योग मे कोइ भी शुभ कार्य नही कर सकते, शुभ कार्य मे क्रकच योग अत्यन्त निन्दित माना जाता है,
इसी प्रकार रविवार को सप्तमी हो तो ओर बुधवार को प्रतिपदा पडवा तिथी हो तो ‘सन्वर्त’ योग बनता है, इसमे किये समस्त कार्य नष्ट हो जाते है,
यह योग शुभ कार्यो को नष्ट करने वाला होता है,
सिद्धि योग मे किये गये सभी कार्य सिद्ध होते हैं, सफ़ल होते हैं,
रविवार को हस्त नक्षत्र होने पर, सोमवार को म्रगशिरा नक्षत्र होने पर, मंगलवार को अश्विनि नक्षत्र होने पर, बुधवार को अनुराधा नक्षत्र होने पर, गुरुवार को पुश्य नक्षत्र होने पर, शुक्रवार को रेवती नक्षत्र ओर शनिवार को रोहिणी नक्षत्र होने से सिद्ध योग बनता है,
समस्त कार्यो की सिद्धि मे यह सिद्ध योग बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है,
रविवार को 14 , 8, 10, तिथी होने से
सोमवार को 12 , 6, 8, 4 तिथी होने से
मंगलवार को 10, 4, 6, 2 तिथी होने से
बुधवार को 8 ,2 , 4, 14 तिथी होने से
गुरुवार को 9 , 14, 2, 12 तिथी होने से
शुक्रवार को 4, 12, 14, 10 तिथी होने से
शनिवार को 2, 10, 12, 8 तिथी होने से
कुलिक, कालपेला, यमघण्ट , ओर कण्टक योग बनते है,
ये समस्त शुभ कार्य को बिगाड़ने वाले योग होते हैं,
इन योगो मे आरम्भ किये गये किसी कार्य मे सफ़लता प्राप्त नही होती हैं, तथा कार्यो मे विघ्न आते हैं..

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