सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन जब पूर्णिमा अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अधिकमास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है और यह भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे “सर्वसिद्धिदायिनी पूर्णिमा” कहा गया है, अर्थात ऐसी पूर्णिमा जो जीवन में शुभ फल, पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।

अधिकमास की पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस पावन तिथि पर किए गए जप, तप, व्रत, दान और सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास की पूर्णिमा पर:
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- आर्थिक बाधाओं में राहत मिल सकती है।
- मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- चंद्र दोष से संबंधित परेशानियों में लाभ मिलने की मान्यता है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है।
अधिकमास पूर्णिमा पर क्या करें?
1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
2. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा
पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी जी की पूजा करें। पीले फूल, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
3. मंत्र जाप
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अधिकमास में भगवान विष्णु के मंत्रों का जप विशेष फलदायी बताया गया है।
4. सत्यनारायण कथा
इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या करवाना शुभ माना जाता है।
5. दान-पुण्य
अन्न, जल, वस्त्र, फल, सत्तू, घड़ा, पंखा अथवा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
ज्योतिष के अनुसार अधिकमास पूर्णिमा का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा तिथि चंद्रमा से जुड़ी मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, मानसिक तनाव अधिक रहता हो, निर्णय लेने में कठिनाई होती हो या पारिवारिक अस्थिरता रहती हो, उनके लिए यह दिन विशेष उपायों और पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अधिकमास पूर्णिमा पर किए जाने वाले सरल उपाय
- चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
- भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
- गरीबों को भोजन कराएं।
- विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- घर में घी का दीपक जलाकर लक्ष्मी-नारायण की आरती करें।
निष्कर्ष
अधिकमास की पूर्णिमा केवल एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, दान और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति चाहते हैं तो अधिकमास पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा, मंत्र जाप और दान अवश्य करें।
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