उज्जैन (अवन्तिका) मे हनुमत्केश्वर शिव की महिमा
श्री राम रावण का वध करके विभीषण जी को लंका का राज्य सोपकर जब भगवान अयोध्या आ गए,
तब हनुमान जी भी भगवान राम की सेवा हेतु अयोध्या में ही रहने लगे थे ,,
एक दिन श्री राम ने हनुमान जी का जगत मे मान बढ़ाने हेतु एक लीला की,
उन्होंने अगस्त ऋषि से कहा कि हनुमान जी और भगवान शिव दोनों में से अधिक बलवान कौन है ??
तब अगस्त ऋषि मन ही मन श्री राम जी के भाव को जान गए..
तब अगस्त मुनि ने कहा कि भगवान हे श्री राम –
श्री हनुमान जी और शिव जी दोनों ही युद्ध और शौर्य में समान है इनमें से किसी एक को कम या अधिक बोलना आसान नहीं होगा..
इन दोनों में से कोई भी को एक कम या अधिक होने की किसी की भी गुंजाइश नहीं है ,,
तब हनुमान जी सोचने लगे कि अगस्त मुनि ने भगवान शिव के समान ही मुझे महत्व दिया है अतः मुझे भी पृथ्वी पर शिवलिंग की स्थापना अवश्य करना चाहिए,,
रावण शिव भक्त था अतः उसने लंका में 6 शिवलिंग को की स्थापना की थी हनुमान जी लंका पहुंच गए और विभीषण से उन छह शिवलिंग में से एक लिंग मांग कर अपने साथ लाने लगे ,,
तब उड़ते उड़ते हनुमान जी महाकाल वन उज्जैन अवंतिका में आ गए,,
हनुमान जी ने उज्जैन के “”रूद्र सरोवर के तट”” पर शिवलिंग को उतारकर उस सरोवर में स्नान किया और महाकाल के दर्शन के लिए जाते समय शिवलिंग को उठाने लगे तो शिवलिंग श्री हनुमान जी से नहीं उठा,,
उस समय स्वयं महाकाल भगवान शिव जी प्रकट हो गए और हनुमान जी को कहा आप यहीं इसी स्थान पर शिवलिंग को अपने आप अपने नाम से स्थापना करो तब हनुमान जी द्वारा स्थापित व शिवलिंग “”हनुमत्केश्वर”” शिव के नाम से विख्यात हो गया,,
हनुमत्केश्वर शिव जी का शनिवार को अभिषेक पूजन व दर्शन किया जाए तो शनि का दुष्प्रभाव कम हो जाता है ,,
शत्रु बाधा शांत होती है और विजयश्री प्राप्त होती है
किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धी परीक्षा हो उसमें सफलता प्राप्त होती है ,,ट्रांसफर तबादला चाहने वाले व्यक्ति को शीघ्र ही मनोवांछित जगह प्राप्त होती है…
ज्योतिष पंडित – सुरेश चन्द्र
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