या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन, हम माँ शैलपुत्री की आराधना करते हैं। देवी दुर्गा का यह पहला स्वरूप, पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं, जिन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है।

माँ शैलपुत्री का स्वरूप माँ शैलपुत्री के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है। वे नंदी नामक बैल पर सवार होकर संपूर्ण जगत में विचरण करती हैं। यह स्वरूप हमें शक्ति, धैर्य और स्थिरता का संदेश देता है।

पूजा का महत्व नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को सुख, सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह दिन प्रकृति के प्रति सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक है।
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आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर माँ शैलपुत्री से सुख-शांति की कामना करें।

जय माता दी!
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