“वास्तुशास्त्र सम्बन्धित मुख्य बातो का दिग्दर्शन “
वास्तु पुरुष का शिर इशान मे है वह अधोमुख होकर प्रिथ्वी पर लेटा हुआ रहता है,
मकान बनाते समय शिलान्यास सर्व प्रथम अग्नि कोण मे करना चाहिए,,
पहला स्तम्भ अग्निकोण मे स्थापित करके दक्षिण , नैऋत्य, पश्चिम, उत्तर तथा पुर्व मे इस क्रम से निर्माण की समाप्ति दक्षिण मे नही करना चाहिए,
अन्यथा धन का नाश एवं स्त्री दोष व पुत्र के लिये हानि कारक होता है,
एक दिवार से मिले हुये दो मकान नही होने चाहिए, अर्थात दोनो मकान की दिवार अलग अलग होनी चाहिए,
अन्यथा दोनो ग्रह स्वामी के लिये हानि कारक होता है, किसी मार्ग या गली का अन्तिम मकान जहा से आगे कोइ मार्ग न हो वह मकान कश्ट देने वाला होता है, धनिष्ठा, शतभिशा, भाद्रपद ,उत्तरा भाद्र पद, ओर रेवती इन पान्च नक्षत्रॊ मे अर्थात पन्चन्ग मे त्रण काश्ठ लकडी फ़र्निचर बनवाना, घर मे फ़र्निचर खरिद कर लाना, मकान मे चोखट दर्वाजा, खिड्की आदि लगाना, छत भरना, शय्या पलंग बनाना या खरिदना, खाट बुनना आदि कार्य निशेध है,
अतः इन कार्यो को पन्चन्ग के दिनो मे नही करना चाहिए,
यदि नये घर का द्वार टुट जाये तो उसमे किसी चिज की हानि होती है, या स्त्री बिमार रहती है,
नये घर मे कोइ वस्तु टुट जाये ,गिर जाये, फ़ट जाये, तो कुटुम्बी जनो मे किसी की मृत्यु होती है, या कश्ट होता है,
फ़ुटे बर्तन मे कलियुग का वास होता है,
अतः घर फ़ुटे बर्तन फ़ुटा मटका, टुटी खाट, नही होना चाहिए,
टुटी खाट रहने से धन हानि होती है,
वृक्ष –
समाधि स्थल मे लगे हुये,
देवमन्दिर मे लगे हुये,
आश्रम मे लगे हुये,
नदियो के संगम पर स्थित
शम्शान भुमी मे लगे हुये
खेत मे लगे हुये
तिराहे चोराहे पर लगे हुये
एसे वृक्ष की लकडी घर मे नही लगाना चाहिए,
काश्ठ को कृष्ण पक्ष मे काटना चाहिए, शुक्लपक्ष मे नही,
घर के समीप मे सचिवालय हो तो धन की हानि होती है,
धुर्त का घर हो तो पुत्र को कश्ट होता है, घर के पास चोराहा हो तो अपशय मिलता है,,
घर के मध्य भाग में द्वार नही बनाना चाहिए, इससे कुल का नाश होता है, तथा धन धान्य का नाश, लडाई, झगडा, तथा स्त्री को दोष लगता है,
घर मे खम्बे आजकल पिलर सम संख्या मे 2,4,6,8 ,10,12 आदि होना चाहिए,
घर मे ये फ़ोटो नही लगाना चाहिये –
सिन्ह, सियार, सुअर, सान्प, गिध, उल्लु, कबुतर, कोआ, बाज, बगुला, गोह, बन्दर, ऊट, बिल्ली, आदि,,
इनके फ़ोटो चित्र या खिलोने के रूप मे नही लगाने चाहिए,
युद्ध के चित्र राक्षस, भुत प्रेत, रोता हुआ मनुश्य का चित्र, फ़ोटो भी घर मे नही लगाना चाहिए,
ये अशूभ फ़ल दायक होते हैं,,
घर के सामने खम्बा होने से स्त्रियों मे दोष आता है,
ग्रह स्वामी की मृत्यु हो सकती है,
कील होने से अग्नि भय होता है,
अपवित्र वस्तु होने से स्त्रियों मे वन्ध्या दोष होता है,
दुसरे घर का द्वार होने से धन धान्य का नाश होता है, यह स्थिति सम्भव्तया मल्टी के फ़्लेट्स मे आ सकती है,
ध्वजा होने से द्रव्य का नाश ओर रोग होता है,
दीवार होने से दरिद्रता आती है,
गड्डा होने से कलह, विरोध ओर धन की हानि होती है,
चबुतरा होने से मृत्यु हो सकती है,
शिला पत्थर की चट्टान होने से पथरी की बिमारी घर के सदस्यो के सदस्यो को होती है तथा लोगो से शत्रुता होती है,
किसी के मकान का कोना घर के सामने होने से दुर्गती ओर म्रत्युभय होता है,
ये सब उस समय फ़ल देते हैं जब द्वार दरवाजे के ठीक सामने हो,
ओर यदि इसके बिच मे लोगो के आने जाने का रास्ता या सडक हो तो कोइ दोष नही देते हैं,

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