“किस तिथी को करे किस देवता की पुजा”
प्रतिपदा पड़वा से लेकर पुर्णिमा ओर अमावस्या सहित कुल सोलह तिथिया होती है,,
इन्ही मे से किसी तिथी मे या तो किसी का जन्म होता है, या किसी की मृत्यु होती है,
मृत्यु होने पर इन्ही तिथीयो मे  श्राद्ध होता है,
इसी कारण श्राद्ध को सोलह श्राद्ध की कहा जाता है,
इन सोलह तिथीयो मे सोलह देवता होते हैं,
अतः इन तिथीयो मे इनके देवताओ की पुजा आराधना करने से भगवान प्रसन्न होते है, तथा कार्यो मे सफ़लता मिलती है,

तथा कोइ विशेष कार्य करते समय  जैसे ग्रह प्रवेश, दुकान की ओपनिंग, ऑफ़िस की ओपनिंग, वाहन खरिदते समय, कोर्ट की पेशी वाले दिन, आदि मे जो तिथी हो उसके देवता की पुजा आराधना करने से देवता प्रसन्न होते हैं,  तथा कार्य सफ़ल होता है,
तिथियों के स्वामी का वर्णन –
1- प्रतिपदा (पड़वा) – इस तिथी के स्वामी अग्निदेव है,  इस दिन अग्नि देव की पुजा करने से सफ़लता मिलती है,
2-द्वितिया तिथी (दुज ) के स्वामी ब्रह्मा जी है,
3- तीज की स्वामी माँ भगवती पार्वती देवी है,
4- चतुर्थी के स्वामी गणेश जी है,
5- पंचमी तिथी के स्वामी सर्प देवता नाग देवता होते हैं,
शुक्ल व कृष्ण पक्ष की पंचमी को नाग देवता का पुजन करने से काल सर्प दोश का संकट दुर होता है,  तथा पित्र दोष का भी संकट दुर होता है,
तथा किसी के परिवार मे सर्प के काट्ने से बिच्छु, ततैया, छिपकली, आदि विशैले जिव के काटने से किसी की मृत्यु हो चुकी हो या विश खा कर मरने वाले को भी पंचमी के दिन पुजा करने से शान्ति मिलती है,
6- षश्टी (छ्ठ) – छ्ठ के स्वामी कर्तिकेय जी होते हैं, इस दिन कार्तिक स्वामी की पुजा करनी चाहिए,
7- सप्तमी – सप्तमी के स्वामी सुर्य देव होते हैं , अतः इस दिन सुर्य नारायण की पुजा करनी चाहिए,
8-अष्टमी – इस तिथी के स्वामी भगवान रुद्र जी है, रुद्राश्ट्क का पाठ करना चाहिए,
9-नवमी – इस तिथी की स्वामी माँ भगवती दुर्गा देवी है,
10- दशमी – इस तिथी के स्वामी स्वयम यमराज है,  यम के भय को खत्म करने के लिये इस दिन यमराज जी की पुजा करे.
11- एकादशी  (ग्यारस )- इस तिथी के स्वामी विश्व्देव है, इस तिथी को व्रत व पुजा करने से सन्तान सुख मिलता है व धन धान्य मे वृद्धि होती है,
12- द्वादशी – इस तिथी के स्वामी विष्णु जी है, इस दिन विष्णु जी की पुजा आराधना करने से मनुष्य विजयी होता है,
13- त्रयोदशी (तेरस) – तेरस तिथी के स्वामी कामदेव जी है,  इनकी पुजा इस दिन करने से समस्त कार्यो मे लाभ मिलता है,
14- चतुर्दशी – इस तिथी के स्वामी शंकर भोलेनाथ जी है, भगवान शिव की आरधना करने से लाभ मिलेगा,
15- पुर्णिमा के स्वामी चन्द्र देव हैं तथा अमावस्या के स्वामी पित्र देवता है, कहते हैं कि चन्द्र देव का पुर्णिमा के दिन ध्यान करने से मनुष्य को सभी कार्यो मे लाभ मिलता है,

ॐ नमः शिवाय

इसी प्रकार तिथीयो की नन्दा, भद्रा, जया , रिका ओर पुर्णा,  सन्ग्या होती है,

1 , 6, ओर 11 ये तिथी नन्दा कही जाती है,
नन्दा तिथी अगर शुक्रवार को आ जाये तो वह सिद्ध तिथी हो जाती है,
उसमे किये कार्य सिद्ध होते हैं, शुक्रवार को 1 ,6 , 11 तिथी शुभ मानी जाती है  परन्तु शुक्ल पक्ष मे अर्थात अमावस्या के दुसरे दिन की तिथी अधम मानी जाती है चाहे उस दिन शुक्रवार हि क्यु न हो,

भद्रा तिथी 2,7,12 मानी गयी है,  ये बुधवार को आ जाये तो सिद्ध मानी जाती है,

जया 3,8,13 ये तिथियां मंगलवार को होने पर कार्यो को सिद्ध करने वाली होती है,

रिका तिथी 4,9,14 ये  तिथियां शनिवार को सिद्ध मानी जाती है, वैसे रिका तिथि मे सभी कार्यो को निशेध माना गया है,
परन्तु शनिवार को इन तिथियो मे भी शुभ कार्य कर सकते हैं,
इसी प्रकार पुर्णा तिथि 5,10,15 ये तिथियां यदि गुरुवार को हो तो सिद्ध मानी गयी है,,
इसी प्रकार नन्दा ,भद्रा , जया, रिका, ओर पुर्णा,  ये तिथियां कुछ वारो मे म्रत मानी गयी है, इनमे शुभ कार्य गलती से भी ना करे,  अन्यथा कार्यो का नाश हो जाता है,
जैसे –
नन्दा,  1 ,6, 11 तिथीया यदि रविवार को आ जाये तो म्रत होती है,
भद्रा 2 ,6, 12 तिथियां सोमवार को म्रत मानी जाती है,
जया 3 ,8 ,13 तिथियां बुधवार को म्रत मानी जाती है ,
रिका तिथी 4,9,14 ये तिथियां गुरुवार को म्रत मानी गयी है,
पुर्णा तिथी 5,10,15, शनिवार को म्रत मानी गयी है,
तथा नंदा 16, 11, तिथी मंगलवार को भी म्रत है, अर्थात ये तिथियां मंगलवार तथा रविवार दोनो को म्रत है,
इसी भद्रा 2, 7, 12 भी सोमवार ओर शुक्रवार को भी म्रत है, इस प्रकार इन वारो मे इन तिथीयो के आने पर कोइ भी कार्य आरम्भ नही करना चाहिए,…

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