शनि ग्रह, यमुना नदी ,ओर यमराज तीनो सुर्य की सन्तान है 


महर्षि कश्यप ओर अदिति के पुत्र हुये सुर्य नारायण भगवान,
  इनका विवाह त्वष्टा नाम के प्रजापति की बेटी “संग्या ” के साथ हुआ था, संग्या भगवान सुर्य नारायण के ताप गर्मी को सहन ना कर सकी, तो अपने पिता के घर चली गयी,  
परंतु त्वष्टा ने अपनी बेटी को समझा बुझा कर वापस सुर्य देव के पास भेज दिया ,
 इसके बाद उन्होने तीन संतान को जन्म दिया, मनु,  यम ओर यमी (यमुना).,
 कुछ काल उपरान्त जब सन्ग्या पुनः सुर्य देव के ताप को सहन ना कर सकी तो उसने अपने बुद्धि बल से अपनी छाया स्वरुण उसी के समान एक स्त्री को उत्पन्न कर ,

उसे  घर मे रखकर,  वह सन्ग्या घोडी (अश्वा)  का रूप धारण कर के उत्तर कुरूदेश मे चली गयी,, 
इधर सन्ग्या के इस छाया रुपी सन्ग्या से सुर्य देव की पुनः तीन संतान हुई – मनु,  शनैश्चर ओर तपती कन्या हुई, 
 यह छाया अपने पुत्रो को अधिक लाड प्यार करती थी ओर पुर्व सन्ग्या की सन्तान यम यमी के साथ दुर्व्यवहार  करती थी,
 तब बहुत दिनो तक सहन करने के बाद यम यमी ने अपने पिता सुर्य से कहा ये हमारी माता नही हो सकती है, 

“”यमः स्वपितरमाह नेय मरस्मन्मातेति “”

तब छाया ने यम को श्राप दे दिया कि तुम प्रेतो के राजा नरक के स्वामी बनो , ओर यमी से कहा तुम प्रिथ्वी पर यमुना नामक नदी बनकर बहो, 

“यम त्वम् प्रेतराजो भव यमि त्वम् यमुना नाम नदी भवेति “

तब सुर्य भगवान कुपित हो गये ओर छाया के पुत्र शनि को श्राप देदिया कि तेरी द्रिश्टी क्रुर हो जाये,  
ओर मन्द गती हो जाये, तथा पाप ग्रहो मे तेरी गणना हो, इसी कारण शनि कि जिस भी ग्रह वस्तु पर  द्रश्टी पड्ती है तो उनका अनिश्ट होता है, यही कारण है कि शनि की द्रश्टी पड्ते हि गणेश जी का सिर धड से अलग हो गया,  शनि की गति भी मन्द हो गयी इसी कारण ढाइ वर्ष मे एक राशि पथ को पार करते है,, 

तपती को श्राप दिया कि तु ताप्ती नामक नदी बनेगी, 
इसके बाद सुर्यदेव को पता चला कि सन्ग्या तो अश्वा (घोडी ) बन गयी है, तो सुर्य देव भी अश्व का रूप बनाकर उनके पास चले गये, 
ओर फ़िर बाद मे इनके दो जुड़वा बच्चो का जन्म हुआ,  अश्वा से उत्पन्न होने के कारण इनका नाम “”अश्विनि कुमार “” विख्यात हुआ, 
स्वयम् ब्रह्मा जी ने इनको देवताओ का प्रमुख वैध्य बनाया था,  यग्य मे भाग लेकर देवता बना दिया, 
आगे चलकर छाया से उत्पन्न मनु इक्ष्वाकु राजा हुए, यही से ये 
 इक्ष्वाकु वंश सुर्य वंश प्रारम्भ हुआ तथा सुर्य की छाया पत्नि से उत्पन्न मनु से सोम से बुध तथा बुध से पुरुवा हुये, यही से इस चन्द्रवंश की उत्पत्ति हुइ…


ज्योतिष पंडित – सुरेश चन्द्र 

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"People ask me what I do in the winter when there's no baseball. I'll tell you what I do. I stare out the window and wait for spring."

~ Rogers Hornsby

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