सच्चे मन से की गई भक्ति का फल
अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस महीने में पूजा, जप, दान और व्रत का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दौरान की गई सच्ची भक्ति व्यक्ति के जीवन से दुख और परेशानियों को दूर करती है।

कथा
प्राचीन समय में एक गांव में एक वृद्ध महिला रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन भगवान विष्णु पर उसकी अटूट श्रद्धा थी। उसके पास धन नहीं था, फिर भी वह प्रतिदिन भगवान का नाम लेकर दीपक जलाती और अधिकमास में व्रत रखती थी।
गांव के लोग उसका मजाक उड़ाते और कहते —
“इतनी गरीबी में पूजा करने से क्या मिलेगा?”
लेकिन वृद्ध महिला हमेशा मुस्कुराकर कहती —
“भगवान अपने भक्तों की भक्ति अवश्य स्वीकार करते हैं।”
अधिकमास के पाँचवें दिन उसने पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा की। उसके पास भोजन बहुत कम था, फिर भी उसने एक भूखे साधु को भोजन करा दिया।
वह साधु वास्तव में स्वयं भगवान विष्णु थे, जो उसकी परीक्षा लेने आए थे।
भोजन करने के बाद साधु ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा —
“तुम्हारे घर में कभी अन्न और सुख की कमी नहीं होगी।”
कुछ ही दिनों में महिला के घर की स्थिति बदलने लगी। घर में सुख-समृद्धि आने लगी और गांव के लोग उसकी भक्ति की प्रशंसा करने लगे।
तब सभी को समझ आया कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
कथा से मिलने वाली सीख
- भगवान केवल सच्ची श्रद्धा देखते हैं, धन नहीं।
- अधिकमास में किया गया दान और सेवा कई गुना फल देता है।
- जरूरतमंद की सहायता करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
- भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं, लेकिन अंत में उन्हें आशीर्वाद अवश्य देते हैं।
अधिकमास के पाँचवें दिन क्या करें?
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
- तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें।
- शाम को विष्णु चालीसा या श्रीहरि स्तुति का पाठ करें।
निष्कर्ष
अधिकमास का पाँचवां दिन हमें दया, सेवा और सच्ची भक्ति का संदेश देता है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से भगवान की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
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