सातवां रामेश्वर ज्योतिर्लिंग,,
जब रावण ने सीता जी का हरण कर लिया तब भगवान श्री राम जी लक्ष्मण जी सुग्रीव जय हनुमान जी जामवंत आदि एवं सुखदेव जी की समस्त सेना ने लंका पर आक्रमण करने हेतु समुद्र किनारे तक चले गए ,,
तब समुद्र पार करने की समस्या उत्पन्न हो गई उसी समय भगवान श्री राम जी को प्यास लगी तब वानर गण मीठा जल लेकर आ गए,,,
श्री राम जी ने वह जल तो पी लिया ,
पर विचार करने लगे कि मैंने अपने स्वामी भगवान भोलेनाथ के दर्शन तो किए ही नहीं फिर जल कैसे पी सकता हूं,
फिर भगवान श्री राम जी ने बालू रेती के पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करके शिव जी का आव्हान किया और अर्ध्य, आचमन ,स्नान धूप, दीप ,नैवेद्य आदि से भगवान भोलेनाथ का पूजन किया,
दिव्य स्रोतों द्वारा यत्न पूर्वक भगवान को संतुष्ट किया,
तब शिव जीे मंत्र व ध्यान में मग्न होकर उन पार्थिव लिंग के सामने नृत्य करने लगे ,
उस समय शिवजी को प्रसन्न करने के लिए गाना बजाना किया तब भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो गए ,
और वे ज्योतिर्मय महेश्वर मां पार्वती जी सहित एवं अन्य सभी पार्षदों सहित वहां तत्काल प्रकट हो गये,,
और भगवान श्री रामचंद्र जी से कहा कि ,श्री राम तुम्हारा कल्याण हो , वर मांगो श्री राम जी ने अनेको स्रोतों द्वारा उनकी स्तुति की ओर कहा , है मेरे स्वामी मेरे रावण पर विजय होने का आशीर्वाद प्रदान करें,,
तथा है मेरे स्वामी आप जगत के लोगों को पवित्र करने तथा दूसरों की भलाई करने के लिए सदा सदा के लिए मेरे द्वारा बनाए गए इस पार्थिव लिंग में अपने ज्योतिर्मयी रूप से निवास करें ,,
उसी समय भगवान शिव महा ज्योतिर्लिंग में लिंग रूप में स्थित हो गए तब से तीनों लोकों में वे “रामेश्वर” नाम से प्रसिद्ध हो गए ,
सभी देवताओं ,वानरो आदि ने भगवान श्री राम जी से रामेश्वर का अर्थ पूछा,
तो भगवान श्री राम बोले जो मेरे राम के ईश्वर है उन्हें रामेश्वर कहां जाता है ,
एक बार नारद जी कैलाश पर्वत पर गए ओर रामेश्वर का अर्थ पूछने लगे तब भगवान भोलेनाथ ने जवाब दिया कि
“भगवान भोलेनाथ श्री राम को अपना इश्वर मानते है, और भगवान श्री राम भोलेनाथ को अपना ईश्वर मानते हैं””
जो मनुष्य रामेश्वर शिवलिंग के दर्शन कर लेता है वह मोक्ष को प्राप्त करता है ,
सतयुग के 10 वर्षों का पुण्य ,त्रेता युग में 1 वर्ष में प्राप्त होता है वही पुण्य द्वापर युग में एक मास में तथा कलयुग में 1 दिन में प्राप्त होता है,,
परंतु रामेश्वर का दर्शन करने से वही पुण्य करोडो गुना होकर एक ही पल में प्राप्त हो जाता है,,
रामेश्वर शिवलिंग पर जो गाय के दूध से स्नान कर आता है उसकी 21 पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है ,
रामेश्वर शिव या किसी भी शिवलिंग को नारियल के जल से स्नान कराता है वह ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है..
जय श्री महाकाल
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