अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने का हर दिन विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। अधिकमास का तीसरा दिन विशेष रूप से श्रद्धा, सेवा और सच्ची भक्ति का संदेश देता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

पौराणिक कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन भगवान विष्णु पर उसकी अटूट श्रद्धा थी। उसके पास धन-संपत्ति नहीं थी, फिर भी वह प्रतिदिन भगवान का नाम लेकर पूजा करती और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करती थी।
अधिकमास के तीसरे दिन वह सुबह जल्दी उठी, स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की। पूजा के बाद उसने अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक भूखे साधु को भोजन कराया।
साधु उसकी भक्ति और सेवा भावना से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने महिला से कहा —
“माता, अधिकमास में सच्चे मन से की गई पूजा और दान कभी व्यर्थ नहीं जाते। भगवान विष्णु अपने भक्तों की हर परेशानी दूर करते हैं।”
कुछ समय बाद उस महिला के जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे समाप्त होने लगीं। उसके घर में सुख, शांति और अन्न-धन की वृद्धि होने लगी। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि अधिकमास में श्रद्धा और सेवा भाव से किया गया छोटा-सा पुण्य कार्य भी कई गुना फल देता है।
अधिकमास के तीसरे दिन क्या करें?
1. भगवान विष्णु की पूजा करें
सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी दल, पीले फूल और प्रसाद अर्पित करें।
2. मंत्र जाप करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. जरूरतमंदों की सहायता करें
गरीबों को भोजन, वस्त्र और अन्न दान करें। सेवा और दान का इस दिन विशेष महत्व बताया गया है।
4. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
गीता, विष्णु सहस्रनाम और भागवत कथा का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है।
5. सात्विक जीवन अपनाएं
क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन से दूर रहें। संयम और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए?
- विवाह और सगाई
- गृह प्रवेश
- नया व्यापार शुरू करना
- तामसिक भोजन
- क्रोध और विवाद
यह महीना भक्ति और आत्मचिंतन के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
अधिकमास का आध्यात्मिक संदेश
अधिकमास का तीसरा दिन हमें सिखाता है कि भगवान केवल धन नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भावना देखते हैं। यदि व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की भक्ति करता है और दूसरों की सहायता करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आते हैं।
निष्कर्ष
अधिकमास का तीसरा दिन सेवा, दान और भगवान विष्णु की भक्ति का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसलिए अधिकमास में श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु की आराधना अवश्य करें।
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