नवरात्रि, शक्ति उपासना का वह महापर्व है जब भक्त माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कर उनसे शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इन्हीं नौ दिनों में, दस महाविद्याओं में से एक, माँ बगलामुखी की साधना का भी विशेष महत्व होता है।


माँ बगलामुखी का नवरात्रि में महत्व

माँ बगलामुखी को ‘स्तंभन’ की देवी कहा जाता है, जिसका अर्थ है, अपने शत्रु की शक्ति, बुद्धि और वाणी को स्तंभित (रोक) कर देना। नवरात्रि में उनकी साधना करने से भक्तों को असाधारण शक्ति और सुरक्षा मिलती है।

  • शत्रु नाश: यदि आप अपने जीवन में शत्रुओं से परेशान हैं या कोई आपको लगातार हानि पहुँचाने का प्रयास कर रहा है, तो माँ बगलामुखी की पूजा से वे शांत हो जाते हैं। उनकी कृपा से शत्रु अपनी ही नकारात्मक ऊर्जा से पराजित हो जाते हैं।
  • वाद-विवाद में विजय: कानूनी मामलों, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों या किसी भी प्रकार के वाद-विवाद में विजय पाने के लिए माँ बगलामुखी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
  • नकारात्मकता का नाश: माँ बगलामुखी की साधना से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र और तंत्र-मंत्र का प्रभाव समाप्त हो जाता है। वे एक सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं।
  • आत्म-विश्वास में वृद्धि: उनकी पूजा से व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है और वह भयमुक्त हो जाता है। वे भय और अनिश्चितता को दूर कर साहस प्रदान करती हैं।

नवरात्रि में माँ बगलामुखी की पूजा

नवरात्रि के दौरान आप माँ बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिए इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • पीले रंग का प्रयोग: माँ बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र धारण करें, पीले फूल (गेंदा, पीले गुलाब), और पीली मिठाई का भोग लगाएं।
  • मंत्र जाप: प्रतिदिन “ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जाप करें। यह मंत्र विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
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  • सात्विक आचरण: पूजा के दौरान मन और शरीर को शुद्ध रखें, तामसिक भोजन से दूर रहें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

नवरात्रि के इन पावन दिनों में माँ बगलामुखी की साधना कर आप अपने जीवन से सभी बाधाओं को दूर कर सकते हैं और विजय पथ पर अग्रसर हो सकते हैं।

सभी बाधाओं और परेशानियों से दूर रहने के लिए माता बगलामुखी का यह यंत्र जरूर अपने घर में रखें

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जय माता दी!

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